My Thoughts

विचार शाश्वत होते हैं परंतु उनका उद्गम भाषा से ही संभव है क्योंकि उसी की वल्गाओं को थामकर वे मूर्तरूप ले सकते है। इसी कारण भाषा विचारों का शिल्प है , विचारों की पालनहार जननी है , उनके प्रगटीकरण का माध्यम है। भाषा ने अपने विभिन्न स्वरूपों से विभिन्न संस्कृतियों के विकास में अपनी महत्वपूर्ण … Continue reading My Thoughts

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"आनन्द " फ़िल्म को मैं जब भी देखता हूँ , खुद को दूर कहीं दूर किसी स्रोतस्विनी की जलधारा के साथ प्रवाहित होता पाता हूँ , अनजान किनारों के बीच ! " आनन्द मरा नहीं , आनन्द मरा नहीं करते। " यह वाक्य जैसे चारों ओर प्रतिध्वनित होता रहता है। कितना दुःख , दर्द और … Continue reading My Thoughts

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जिंदगी को हांर-जीत के नजरिये से देखना हमारी खुद की भूल है। जिंदगी तो अपने प्रवाह में गतिमान रहती हे। इसीलिए जिंदगी में जानबूझकर हारने वाली बाजी की बिसात खुद-ब-खुद बिछाना कभी-कभी सबको साथ लेकर चलने के लिए जरूरी होता है। इसका मजा लेने के लिए जिंदगी को एक नए आईने से देखने की जरूरत … Continue reading My Thoughts

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प्रकृति अपने अनुपम सौंदर्य , मनोरम छटा , निश्छलता , निरंतरता , प्रवाह और अप्रतिम उपादानों तथा बिम्बों के माध्यम से मानवता को कितने सशक्त सन्देश देती है। मनुष्य जितना प्रकृति से दूर होता जाता है , उतना ही वह तनाव , कलुषता , वैमनस्य और स्वार्थपरता की दुर्बलताओं से ग्रसित होता जाता है। महान … Continue reading My Thoughts