रात्रि-तिमिर में धवल चाँदनी को लजाता ,
व्योम के नीले-तल के देदीप्यमान रूप को सँवारता ,
ताराकिणी निशा के रुपहले दामन से परिहास करता ,
मस्तिष्क की समस्त ऊर्जा को एकचित्त करता ,
हवाओं की अदृश्य ऊष्मा को संग्रहीत करता ,
दिशाओं को अपनी लक्ष्य-चेतना से अभिज्ञ कराता ,
नीरवता के शून्य-जल में विकिरण उत्पादित करता ,
झंझावातों में भी आशा की उड़ान भरता ,
शुचितर विश्व की मंगलकामना सँजोता ,
अगणित आँखों की आकांक्षाओं का साक्षी बनता ,
तिमिर-तल में सर्वत्र आलोक का सृजन करता ,
किसी प्रणेता के स्वरों को अभिव्यक्ति देता ,
काल-खण्ड में एक नई गाथा लिखता ,
उम्मीद का अनोखा दीप प्रज्वलित हुआ !!

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