मदहोश हवाओं ने जो उसके दर पर दस्तक दी , वो कतरों में जी रहा था उसने ख़ुदकुशी कर ली ! उनको कोई इल्म न था अपनी महसूफ़ियत में , उसकी साँसें बेज़ार थीं मुफ़लिसी की गर्दिश में ! वो बेइंतहा मशग़ूल थीं अपनी शौके-फ़ितरत में , उसकी ज़िन्दगी खौफ़जदा थी फ़ना के मंज़र में … Continue reading बेज़ार ज़िंदगी :
बेख़ुदी :
हमें ये इल्म है हमने ढेरों नसीहतें दी है , ख़ुद अमल करने का हौसला नहीं होता। हर रोज़ ग़ैरों को आइना दिखाते हैं हम , ख़ुद से बात करने का हौसला नहीं होता। बेपनाह मंज़िलों की ख़्वाहिश लिए हैं हम , पर ख़ुद पे ऐतबार का हौसला नहीं होता ! वो बेपर्दा हो इसी … Continue reading बेख़ुदी :
हौसला :
उसे यक़ीन था ये क़ातिलों की महफ़िल थी , कौनसी मुराद लिए वो फिर भी चला आया ! वो वज़्म तो उसे गुनहग़ार ही ठहरा रही थी , कौनसी आरज़ू लिए वो फिर भी चला आया। लोग तो उसकी बर्बादी का जश्न मना रहे थे , कौनसी मन्नतें लिए वो फिर भी चला आया। वो … Continue reading हौसला :
वीर सावरकर पार्क , पोर्ट ब्लेयर :
जैसे ही पोर्ट ब्लेयर की सेल्युलर जेल से बाहर निकलते हैं तो दाहिनी ओर वीर सावरकर पार्क है। इसे रात्रि में देखना अत्यंत मनोहारी होता है। रात्रि में आकर्षक विद्युत -रोशनी में नहाया हुआ यह पार्क सहज ही अपनी ओर ध्यानाकर्षण करता है। यहाँ से नीचे पोर्ट ब्लेयर शहर की जगमगाती रोशनी तथा समुद्र के … Continue reading वीर सावरकर पार्क , पोर्ट ब्लेयर :
पोर्ट ब्लेयर , अंडमान की सेल्युलर जेल :
१४ फरवरी , २०१९ से १९ फरवरी , २०१९ तक मुझे अंडमान द्वीपों की यात्रा का सुअवसर मिला। मेरी पत्नी श्रीमती निधि कुमार भी मेरे साथ थीं। इस यात्रा के दौरान हमें पोर्ट ब्लेयर की विश्व विख्यात 'सेल्युलर जेल' को देखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। यहां की इस पवित्र भूमि का हमें दिन में तथा … Continue reading पोर्ट ब्लेयर , अंडमान की सेल्युलर जेल :
चिन्ता :
हे मन में उपजी चिन्ता ! तू भाग्य की दुष्ट-रेखा , तू मृग-मरीचिका की चल-रेखा , तू मरु-प्रदेश की जल-इच्छा , तू घिराव-फँसाव-भटकाव की जननी , तू निष्ठुरता की दीर्घ-लहरी , तू व्यथा तरंगों की धात्री , डस लेती जैसे हो सर्पिणी , तू मतवाली , तू कालजयी , तू तो नितांत स्वेच्छाचारी ! तू … Continue reading चिन्ता :
चुनावों का उत्सव या दुर्भाग्य का सोपान :
इस देश में जब चुनाव आते है तो लगता है यह कुछ चंद लोगों , टी.वी. चैनलों और अनर्गल प्रलाप से अपनी पहचान बनाने में लगे कुछ तथाकथित मनीषियों के लिए उत्सव की तरह आते है। जैसे एक-दो माहों के लिए उन्हें अपना-अपना राग-अलापने का नया मसाला दे जाते है और नए-नए अभिनय-कर्ताओं के नए-नए … Continue reading चुनावों का उत्सव या दुर्भाग्य का सोपान :
APPLICATION OF MENS REA UNDER GST LAW:
Application of mens rea in fiscal law has always been a matter of great concern and debate . Even various legal pronouncements have expressed conflicting views on this issue but it is pertinent to note that such pronouncements have been made by the respective courts on the basis of … Continue reading APPLICATION OF MENS REA UNDER GST LAW:
एक ज्वलंत प्रश्न यह भी !
किसी भी देश की सभ्यता को यदि नष्ट करना है तो उसकी संस्कृति और शिक्षा दोनों को नष्ट करके ही इस उद्देश्य की पूर्ति संभव है। यह बात प्रत्येक आक्रांता को हमेशा ज्ञात रही और इसी कारण इस देश में आने वाले आक्रांताओं ने सबसे पहले इस देश की शिक्षा और संस्कृति पर करारा … Continue reading एक ज्वलंत प्रश्न यह भी !
जातिवाद की जंजीर में क़ैद :
एल्बर्ट स्पेयर ने १९ वीं सदी के भारत के विषय में लिखा था कि इस देश में ब्राह्मण , क्षत्रिय , वैश्य , सिख ,पारसी , ईसाई , मुस्लिम तथा अन्य जातियों के लोग तो बसते हैं लेकिन कोई इंडियन कहने वाला दिखाई नहीं देता। यह बात समझी जा सकती है क्योंकि उस समय भारत … Continue reading जातिवाद की जंजीर में क़ैद :