By Notification No.11/2017-Central Tax ( Rate) Dated 28th June , 2017 following services listed at entry no. 24 have been exempted : "24 ( Heading 9986) Support services to agriculture , forestry , fishing , animal husbandry. Explanation : "Support services to agriculture , forestry , fishing , animal husbandry " mean – (i) Services … Continue reading SERVICES RELATED TO CHILLING OF MILK:
Clarification Regarding Order U/S 129(3) :
Sub-section (1) of Section 129 of the CGST Act / SGST Act , 2017 embodies following provisions : 129. Detention, Seizure and release of goods and conveyances in transit : (1) Notwithstanding anything contained in this Act, where any person transports any goods or stores any goods while they are in transit in contravention of … Continue reading Clarification Regarding Order U/S 129(3) :
दर्द :
दर्द ! तुमने मुझको दी ये कौन-सी तन्हाइयाँ , चाहतें सब ग़ुम हुई और बन गयीं रुसवाइयाँ , दौड़ते थे छूने को जो कल तक मेरी परछाइयाँ , सुनसान हुए वो रास्ते और वीरान पगडंडियाँ ! जो कभी करती थीं आँगन में मेरे अटखेलियाँ , अपनों की वो महफिलें और झूमती नजदीकियाँ , तुमने अपने … Continue reading दर्द :
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता :
पथिक ! यह देश अब स्वतन्त्र है , यहाँ कुछ भी कहने की स्वतन्त्रता है , हाँ ! किसी के लिए कुछ भी कहने की , मर्यादाओं की परिधि को तिलांजलि देकर , अपशब्दों की सीमाओं को लांघकर , मान-सम्मान जैसी निरर्थकता को भूलकर , अपनी दुंदुभी का गुणगान करते , अपने दम्भ और मदमत्तता … Continue reading अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता :
प्यासी रेत :
पथिक ! न जाने किसका शाप ढोती है , रेगिस्तान की वीरानियों में पलती रेत ! जिसकी नियति है तपना और तड़पना , जन्मों की प्यास अन्तस् में दबाये रखना , अपनी तन्हाई में ख़ुद ही जलते रहना , कभी किसी से अपनी व्यथा न कहना , तेज आँधियों के भीषण प्रहार सहना , चक्रवातों … Continue reading प्यासी रेत :
एक ज्वलंत प्रश्न यह भी !
किसी भी देश की सभ्यता को यदि नष्ट करना है तो उसकी संस्कृति और शिक्षा दोनों को नष्ट करके ही इस उद्देश्य की पूर्ति संभव है। यह बात प्रत्येक आक्रांता को हमेशा ज्ञात रही और इसी कारण इस देश में आने वाले आक्रांताओं ने सबसे पहले इस देश की शिक्षा और संस्कृति पर करारा कुठाराघात … Continue reading एक ज्वलंत प्रश्न यह भी !
एक विचार यह भी :
कभी-कभी सोचता हूँ कि संसार में ऐसा कुछ भी नहीं जो कुछ न कुछ अभिव्यक्त न करता हो। बस ये तो हम पर ही निर्भर करता है कि हम इस अभिव्यक्ति को कब और कैसे जान पाते हैं,उससे कैसे सहकार करते हैं। यह अभिव्यक्ति कब हमारे अंतस को आंदोलित कर दे यह तो कभी-कभी हम … Continue reading एक विचार यह भी :
अद्भुत चित्रकार :
पथिक ! तनिक ध्यान से देखो , चितेरे ने बना दीं अनगिनत रंग-बिरंगी तस्वीरें , कुछ को दे दी चटकीले रंगों की सौगात , प्रियतम से मिलकर चलती किसी अल्हड की तरह , कुछ को दे दिए उत्तेजना के लाल रंग , गगन में चमकती-गरजती विद्युल्लता की तरह , कुछ को सँवार दिया शांत से … Continue reading अद्भुत चित्रकार :
एकाकीपन :
जाने किसके शाप से शापित है ये जनजीवन , कुहासे में लुप्त हुए हैं कुटुम्ब और कुटुम्बीजन , अपने-अपने सुख हैं सबके अपने-अपने ग़म , देखता हूँ हर तरफ ये जीवन का एकाकीपन ! अपनी परिधि में होते मुदित यहाँ सभी के मन , ट्विटर , फेसबुक , वाट्सएप बना नया जीवन , रिश्ते-नाते कौन … Continue reading एकाकीपन :
बदलती हवायें :
हवाओं ने अपना रुख़ बदल लिया है , उसके दरवाजे अब वो दस्तक नहीं सुनते , जिसकी आदत थी उन्हें सुनने की , वो रंजोग़म की स्याही भी न रही , जो रोज़ लिखती थी सफ़ों पर , चाही-अनचाही न जाने कितनी बातें , न जाने कहाँ गयीं वो बेचैनियाँ , और वो दिन-रात की … Continue reading बदलती हवायें :