इस शहर का अंदाज़ कुछ अज़ीब हो गया है ,
ओहदे तो बढ़ गए हैं इंसान छोटा हो गया है !

यहाँ की हवाएं भी कभी बेवज़ह नहीं चलतीं ,
यहां रुतों का मिज़ाज भी मग़रूर हो गया है !

ख़ुदग़रज़ी तो यहाँ के हर शख़्स का हुनर है ,
मौक़ापरस्ती का चलन अब आम हो गया है !

अपने आशियाँ की फ़िक्र अब किसे है यहाँ ,
तमाशाइयों की भीड़ में ये शहर खो गया है !

वो जो ख़ैरख़्वाह बनके तिजारत में लगे हैं ,
उनमें शहर को जलाने का फ़न बढ़ गया है !

इस शहर का अंदाज कुछ अज़ीब हो गया है

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