सबकुछ यहाँ अपनी करनी से ही पाया और खोया है ,
किसी पड़ाव पर यह सोचना भी कभी भला लगता है !

किससे क्या मिला किसने क्या दिया यह सोच आम है ,
किसको क्या दिया ये सोचना भी कभी भला लगता है !

उम्र तो उम्र है एक दिन मुक़म्मिल होना तो लाज़मी है ,
ख़ुद से गुफ़्तगू करें ये ख़्याल भी कभी भला लगता है !

यूँ तो इन आँधियों के झोंकों ने बहुत कुछ उजाड़ा है ,
गीली रेत के घरोंदे बनाना भी कभी भला लगता है !

वक़्त का तूफ़ान यूँ तो बहुत कुछ उड़ाकर ले गया है ,
मझधार में कश्ती को खेना भी कभी भला लगता है !

ज़िंदगी ने तो इस सफ़र में जाने कितने नाम दे दिए ,
भूले नामों से कोई पुकारे ये भी कभी भला लगता है !

योगेंद्र कुमार

One thought on “ख़्वाहिशें :

  1. ज़िंदगी ने तो इस सफ़र में जाने कितने नाम दे दिए ,
    भूले नामों से कोई पुकारे ये भी कभी भला लगता है !
    लाजवाब

    Like

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s