दूर तक फैले अँधेरों की ही नहीं ,
बहती हवाओं की भी होती हैं परतें ,
जिन पर हर रोज़ लिखती है ज़िन्दगी ,
धमनियों में बहते लहू के कम्पन ,
अन्तस की धड़कन के मध्यम स्वर ,
आँखों में पलती आशाओं के उन्मीलन ,
स्वप्न खगों की उड़ान के मधुरिम गान ,
अपेक्षाओं के अधूरे संवाद ,
उलझते प्रश्नों के झंझावात ,
स्मृतियों में सिमटी अनकही बातें ,
ह्रदय पर संघात करती आर्त वेदनाएं !
क्षितिज के भी उस पार ,
न जाने किस गंतव्य के लिए ,
अपनी ही उधेड़बुन में हर रोज़ ,
बस ऐसे ही लिखती है ज़िन्दगी ,
हवाओं की परतों पर अपनी गाथा !

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